स्वर्ण मौद्रिकरण योजना 2017-18 – मध्यम एवं दीर्घ अवधि में ब्याज का भुगतान

October 18, 2017 | Last Modified: October 18, 2017 at 11:57 am | Category: सरकारी योजनाएं हिंदी में 2017-2018

केंद्र सरकार ने स्वर्ण मौद्रिकरण योजना 2017-18 की शुरुआत की है। इस योजना के तहत मध्यम एवं दीर्घ अवधि के जमा पर बकाया ब्याज का भुगतान तत्काल करने के लिए बैंकों को निर्देश जारी किया है। इस स्वर्ण मौद्रिकरण योजना को 5 नवंबर 2015 में लागू किया गया है। इस योजना के अंतर्गत अधिकतम सोने की मात्रा का निर्धारण नहीं किया गया है अर्थात जमाकर्ता 30 ग्राम से लेकर अपनी इच्छानुसार सोना जमा कर सकता है। किसी भी मध्यावधि जमा (5-7 वर्ष) को तीन वर्ष के बाद निकासी की अनुमति दी जाएगी जबकि दीर्घकालिक अवधि के जमा (12-15 वर्ष) को पांच वर्ष के बाद निकासी की अनुमति दी जाएगी।

स्वर्ण मौद्रिकरण योजना 2017-18 :

स्वर्ण मौद्रिकरण योजना के तहत एक से तीन साल की अवधि को अल्पकाल, तीन से पांच साल को मध्यम अवधि और पांच से सात साल को दीर्घ अवधि माना गया है। मध्यम और दीर्घ अवधि के जमा पर ब्याज की दर सरकार तय कर रही है जबकि अल्प अवधि के जमा पर दरें तय करने का अधिकार बैंकों को दिया गया है। उसने कहा कि बैंकों को सलाह दी जाती है कि जमाकर्ताओं को उनके बकाया ब्याज का भुगतान तुरंत किया जाए। साथ ही भविष्य में तय तारीख पर उन्हें ब्याज का भुगतान करने की हिदायत भी दी जाती है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों से कहा है कि जमाकर्ताओं को ब्याज का भुगतान करने के बाद वे आर.बी.आई. से उसके लिए दावा कर सकते हैं।

इस योजना के तहत लाभ देने के लिए सरकार ने एक समर्पित वेबसाइट http://www.finnin.nic.in/swarnabharat और एक टोल फ्री नंबर 18001800000 भी प्रारंभ किया है जो इन योजनाओं के बारे में जानकारियां मुहैया कराता है। इस स्वर्ण जमा खाते पर वही नियम लागू होंगे जो सामान्यतः किसी जमा खाते पर होते हैं। इस सोने के एवज में मिलने वाले ब्याज पर कोई आयकर या पूंजीगत लाभ कर/ टैक्स नहीं लगेगा। सरकार इस योजना में भाग लेने वाले बैंकों को 2.5% कमीशन देगी जिसमें संग्रह और शुद्धता जांच केंद्र/रिफाइनर्स के लिए अदा किए जाने वाले शुल्क शामिल हैं।

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